श्री शारदा सर्वज्ञ पीठम 🚩 श्रीनगर
🚩जय सत्य सनातन🚩
🌥️ 🚩युगाब्द-५१२४
🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०७९
⛅ 🚩तिथि - प्रतिपदा रात्रि 01:21 तक तत्पश्चात द्वितीया
⛅दिनांक - 29 जुलाई 2022
⛅दिन - शुक्रवार
⛅शक संवत - 1944
⛅अयन - दक्षिणायन
⛅ऋतु - वर्षा
⛅मास - श्रावण
⛅पक्ष - शुक्ल
⛅नक्षत्र - पुष्य सुबह 09:47 तक तत्पश्चात अश्लेषा
⛅योग - सिद्धि शाम 06:36 तक तत्पश्चात व्यतिपात
⛅राहु काल - सुबह 11:07 से 12:36 तक
⛅सूर्योदय - 06:09
⛅सूर्यास्त - 07:24
⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में
⛅ब्राह्ममुहूर्त - प्रातः 04:43 से 05:26 तक
⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:25 से 01:08 तक
⛅व्रत पर्व विवरण - व्यतिपात योग
⛅ विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा,पेठा) न खाएं, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌹व्यतिपात योग में किया हुआ जप, तप, मौन, दान व ध्यान का फल १ लाख गुना होता है ।
🔹सावधानी से स्वास्थ्य - भाग (१)🔹
🔹स्वस्थ रहने के लिए स्वास्थ्यरक्षक कुछ नियम जान लें
👉 ब्राह्ममुहूर्त में उठें (सूर्योदय से लगभग दो घंटे पूर्व ब्राह्ममुहूर्त होता है ।)
👉 सुबह खाली पेट रात का रखा हुआ (गुनगुना) पानी पियें । इससे पेट की तमाम बीमारियाँ दूर हो जाती हैं । कब्ज अनेक बीमारियों की जड़ है, वह इस प्रयोग से दस दिन में ठीक हो जाती है ।
👉 सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान करें । सर्वप्रथम अपने सिर पर पानी डालें फिर पूरे शरीर पर ताकि सिर आदि शरीर के ऊपरी भागों की गर्मी पैरों से निकल जाय । अगर पहले पैरों पर पानी डालते हैं तो पैरों की गर्मी सिर पर चढ़ती है । अतः सावधानी रखें ।
👉 सदैव सूती एवं स्वच्छ वस्त्र पहनें । कृत्रिम (सिंथैटिक) कपड़े न पहनें । ये कपड़े जीवनशक्ति का ह्रास करते हैं ।
👉 चौबीस घंटों में केवल दो बार भोजन करें । अगर तीसरी बार करते हों तो बहुत सावधान रहें, हलका नाश्ता करें ।
🔹धन-सम्पत्ति के लिए क्या करें ?🔹
👉 घर के अंदर, लक्ष्मी जी बैठी हों ऐसा फोटो रखना चाहिए और दुकान के अंदर, लक्ष्मी जी खड़ी हों ऐसा फोटो रखना चाहिए ।
👉 ईशान कोण में तुलसी का पौधा लगाने से तथा पूजा के स्थान पर गंगाजल रखने से घर में लक्ष्मी की वृद्धि होती है ।
👉 नौकरी-धंधे के लिए जाते हों और सफलता नहीं मिल पाती हो तो इक्कीस बार 'श्रीमद् भगवद गीता' का अंतिम श्लोक बोलकर फिर घर से निकलें तो सफलता मिलेगी । श्लोकः
यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम ।।
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