श्री शारदा सर्वज्ञ पीठम🚩 कश्मीर

🚩जय सत्य सनातन🚩

🌥️ 🚩युगाब्द-५१२४

🌥️ 🚩विक्रम संवत-२०७९

⛅ 🚩तिथि - चतुर्दशी प्रातः 04:00 तक तत्पश्चात पूर्णिमा

⛅दिन - बुधवार

⛅शक संवत - 1944

⛅अयन - दक्षिणायन

⛅ऋतु - वर्षा

⛅मास - आषाढ़

⛅पक्ष - शुक्ल

⛅नक्षत्र - पूर्वाषाढ़ा रात्रि 11:18 तक तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा

⛅योग - इन्द्र दोपहर 12:45 तक तत्पश्चात  वैधृति

⛅राहु काल - दोपहर 12:45 से 02:26 तक

⛅सूर्योदय - 06:03

⛅सूर्यास्त - 07:29

⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में

⛅ब्रह्म मुहूर्त - प्रातः 04:38 से 05:20 तक

⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:24 से 01:07 तक

⛅व्रत पर्व विवरण - गुरु पूर्णिमा/व्यास पूर्णिमा/आषाढ़ पूर्णिमा, विद्यालाभ योग

⛅ विशेष - पूर्णिमा के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है ।

(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29)

🔹विद्यालाभ योग - 13 जुलाई 2022🔹


🌹विद्यालाभ हेतु मंत्र : ‘ॐ एें ह्रीं श्रीं क्लीं वाग्वादिनि सरस्वति मम जिह्वाग्रे वद वद ॐ एें ह्रीं श्रीं क्लीं नमः स्वाहा'


🔸13 जुलाई 2022 को रात्रि 11ः18 से रात्रि 11ः45 बजे तक 108 बार जप लें और फिर मंत्रजप के बाद उसी दिन रात्रि 11ः30 से 12 बजे के बीच जीभ पर लाल चंदन से ‘ह्रीं’ मंत्र लिख दें । जिसकी जीभ पर यह मंत्र इस विधि से लिखा जायेगा, उसे विद्यालाभ व विद्वत्ता की प्राप्ति होगी ।


 🌹गुरु का मानस-पूजन कैसे करें गुरु पोर्णिमा को ?


🌹गुरुपूनम को सुबह उठें, नहा-धोकर थोडा-बहुत धूप, प्राणायाम आदि करके श्रीगुरुगीता का पाठ कर लें ।


🌹फिर इस प्रकार मानसिक पूजन करें : ‘मेरे गुरुदेव ! मन-ही-मन, मानसिक रूप से मैं आपको सप्ततीर्थों के जल से स्नान करा रहा हूँ । मेरे नाथ ! स्वच्छ वस्त्रों से आपका चिन्मय वपु (चिन्मय शरीर) पोंछ रहा हूँ । शुद्ध वस्त्र पहनाकर मैं आपको मन से ही तिलक करता हूँ, स्वीकार कीजिये । मोगरा और गुलाब के पुष्पों की दो मालाएँ आपके वक्षस्थल में सुशोभित करता हूँ ।


🌹आपने तो हृदयकमल विकसित करके उसकी सुवास हमारे हृदय तक पहुँचायी है लेकिन हम यह पुष्पों की सुवास आपके पावन तन तक पहुँचाते हैं, वह भी मन से, इसे स्वीकार कीजिये । साष्टांग दंडवत् प्रणाम करके हमारा अहं आपके श्रीचरणों में धरते हैं ।


🌹हे मेरे गुरुदेव ! आज से मेरी देह, मेरा मन, मेरा जीवन मैं आपके दैवी कार्य के निमित्त पूरा नहीं तो हररोज २ घंटा, ५ घंटा अर्पण करता हूँ, आप स्वीकार करना । भक्ति, निष्ठा और अपनी अनुभूति का दान देनेवाले देव ! बिना माँगे कोहिनूर का भी कोहिनूर आत्मप्रकाश देनेवाले हे मेरे परम हितैषी ! आपकी जय-जयकार हो ।

🔹विद्यार्जन में बाधक ७ दोष

🔹आलस्यं मदमोहौ च चापलं गोष्ठिरेव च ।

स्तब्धता चाभिमानित्वं तथात्यागित्वमेव च ।

एते वै सप्त दोषा: स्यु: सदा विद्यार्थिनां मता: ।।


🔹‘आलस्य, मद-मोह, चंचलता, गोष्ठी (इधर-उधर की व्यर्थ बातें करना), जड़ता (मूर्खता), अभिमान तथा स्वार्थ-त्याग का अभाव – ये सात विद्यार्थियों के लिए सदा ही दोष हैं ।’

(महाभारत, उद्योग पर्व :४०.५)

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