श्री शारदा सर्वज्ञ पीठम

🚩जय सत्य सनातन🚩

🌥️ 🚩युगाब्द-५१२३ 

🌥️ 🚩सप्तर्षि संवत-५०९७⛅   🚩विक्रम संवत-२०७८

⛅ 🚩तिथि - तृतीया रात्रि 10:09 तक तत्पश्चात चतुर्थी

⛅ दिनांक 29 अप्रैल 2021

⛅ दिन - गुरुवार

⛅ विक्रम संवत - 2078

⛅ शक संवत - 1943

⛅ अयन - उत्तरायण

⛅ ऋतु - ग्रीष्म 

⛅ मास - वैशाख

⛅ पक्ष - कृष्ण 

⛅ नक्षत्र - अनुराधा दोपहर 02:29 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा

⛅ योग - वरीयान् सुबह 11:49 तक तत्पश्चात परिघ

⛅ राहुकाल - दोपहर 02:13 से शाम 03:50 तक 

⛅ सूर्योदय - 06:10 

⛅ सूर्यास्त - 19:01 

⛅ दिशाशूल - दक्षिण दिशा में

⛅ व्रत पर्व विवरण -

 💥 विशेष - तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

         🌷 विघ्नों और मुसीबते दूर करने के लिए 🌷

👉 30 अप्रैल 2021 शुक्रवार को कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है ।

🌹 शिव पुराण में आता हैं कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी ( पूनम के बाद की ) के दिन सुबह में गणपतिजी का पूजन करें और रात को चन्द्रमा में गणपतिजी की भावना करके अर्घ्य दें और ये मंत्र बोलें :

🌷 ॐ गं गणपते नमः ।

🌷 ॐ सोमाय नमः ।


‪🌷 चतुर्थी‬ तिथि विशेष 🌷

🚩 चतुर्थी तिथि के स्वामी ‪भगवान गणेश‬जी हैं।

📆 हिन्दू कैलेण्डर में प्रत्येक मास में दो चतुर्थी होती हैं। 

🌹 पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी कहते हैं।अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।

🌹 शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्षके। पक्षपापक्षयकरी पक्षभोगफलप्रदा ॥

➡ “ अर्थात प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष के पापों का नाश करनेवाली और एक पक्षतक उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है ।


🌷 कोई कष्ट हो तो 🌷

🌹 हमारे जीवन में बहुत समस्याएँ आती रहती हैं, मिटती नहीं हैं ।, कभी कोई कष्ट, कभी कोई समस्या | ऐसे लोग शिवपुराण में बताया हुआ एक प्रयोग कर सकते हैं कि, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (मतलब पुर्णिमा के बाद की चतुर्थी ) आती है | उस दिन सुबह छः मंत्र बोलते हुये गणपतिजी को प्रणाम करें कि हमारे घर में ये बार-बार कष्ट और समस्याएं आ रही हैं वो नष्ट हों |

👉🏻 छः मंत्र इस प्रकार हैं –

🌷 ॐ सुमुखाय नम: : सुंदर मुख वाले; हमारे मुख पर भी सच्ची भक्ति प्रदान सुंदरता रहे ।

🌷 ॐ दुर्मुखाय नम: : मतलब भक्त को जब कोई आसुरी प्रवृत्ति वाला सताता है तो… भैरव देख दुष्ट घबराये ।

🌷 ॐ मोदाय नम: : मुदित रहने वाले, प्रसन्न रहने वाले । उनका सुमिरन करने वाले भी प्रसन्न हो जायें ।

🌷 ॐ प्रमोदाय नम: : प्रमोदाय; दूसरों को भी आनंदित करते हैं । भक्त भी प्रमोदी होता है और अभक्त प्रमादी होता है, आलसी । आलसी आदमी को लक्ष्मी छोड़ कर चली जाती है । और  जो प्रमादी न हो, लक्ष्मी स्थायी होती है ।

🌷 ॐ अविघ्नाय नम:

🌷 ॐ विघ्नकरत्र्येय नम: 

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