*हनुमान जन्मोत्सव *

आज पवनपुत्र हनुमान जी का जन्मोत्सव है।

हनुमान जी एकाग्रता- धैर्य- शौर्य के देवता हैं । ज्ञानियों में अग्रणी हैं- श्रेष्ठ है- हनुमान जी जैसा विचारक - दार्शनिक नहीं- योद्धा नहीं- हनुमान जी समग्र रूप से आदर्श हैं- कभी अपना परिचय नहीं दिया- अपने आराध्य को आगे रखा - सदैव प्रभु राम के दूत कहलाए और उसमें हनुमान जी ने सदैव सुखानुभूति की।


हनुमान जी के अनुरूप यदि जीवनशैली हो तो जीवन में सफलता ही सफलता है - जीवन पारमार्थिक व सार्थक जीवन ही होगा ।


हमारे जीवन का एक आदर्श रहना चाहिए- उसका अनुकरण- अनुशीलन होना चाहिये- हनुमान जी से बड़ा कोई आदर्श हो नहीं सकता- वह स्वामी व सखा दोनों के लिए ही आदर्श हैं । अपनी समस्त शक्तियों के जागरण के लिए - उनके समयानुकूल प्रयोग के लिए- अपनी ऊर्जा के संरक्षण व प्रयोग के लिए- हनुमान जी एकमात्र आदर्श हैं । 


जीवन में भटकाव से- पथभ्रमित होने से बचाने के लिये- समयानुकूल निर्णय के लिए- दूसरों का सम्मान करने के लिए- हनुमान जी आदर्श हैं । जो सिद्धांतों से विमुख हो जाता है वह भी पिछड़ जाता है- अपने लक्ष्य पर नहीं पहुँच पाता है- हनुमान जी लक्ष्य से भटकने नहीं देते हैं- जो भी लक्ष्य निर्धारित किया- उसको उन्होंने पूरा किया । कभी अपने को कमजोर नहीं समझा - उनके जीवनकाल में अनेकानेक ऐसे अवसर आए - जब उन्होंने पराक्रम के स्थान पर बुद्धि कौशल से विजय पाई । 


विनम्रता की तो साक्षात मूर्ति है - पराक्रम की मिसाल है । दोनों ही रूप लंका में देखने को मिलें । हनुमान जी का बुद्धि कौशल और युद्ध कौशल दोनों ही अतुलनीय हैं ।


हमारा जैसा इष्ट होता है - हमारी वृत्ति वैसी ही बन जाती है । रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि- कवन सो काज कठिन जग माही- जो नहीं होई तात तुम पाही।


स्पष्ट है कि श्री हनुमान जी के लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है - इसीलिए उन्हें अतुलित बल धानम कहा जाता है । भुवन भास्कर भगवान सूर्य देव से शिक्षा पाकर ज्ञानी नाम ग्रण गन्यम कहा जाता है - ज्ञानियों में अग्रगण्य है - सकल गुणों के धाम हैं ।


आज हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर हम रामदूत- अतुलनीय बल के धाम - जानकी माता के प्यारे - दुलारे - अपने इष्टदेव प्रभु श्री हनुमान जी के चरणों में वंदना करते है - दण्डवत् प्रणाम करते हैं- एवम् सर्व जन कल्याण हेतु विनम्रता पूर्वक निवेदन करते है ।


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