श्री शारदा सर्वज्ञ पीठम

🚩जय सत्य सनातन🚩

🌥️ 🚩युगाब्द-५१२३ 

🌥️ 🚩सप्तर्षि संवत--५०९७⛅  🚩विक्रम संवत-२०७८

⛅ 🚩तिथि - एकादशी रात्रि 09:47 तक तत्पश्चात द्वादशी

⛅ दिनांक 23 अप्रैल 2021

⛅ दिन - शुक्रवार

⛅ विक्रम संवत - 2078

⛅ शक संवत - 1943

⛅ अयन - उत्तरायण

⛅ ऋतु - ग्रीष्म 

⛅ मास - चैत्र

⛅ पक्ष - शुक्ल 

⛅ नक्षत्र - मघा सुबह तक 07:42 तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी

⛅ योग - वृद्धि दोपहर 02:40 तक तत्पश्चात ध्रुव

⛅ राहुकाल - सुबह 11:01 से दोपहर 12:37 तक

⛅ सूर्योदय - 06:14 

⛅ सूर्यास्त - 18:59 

⛅ दिशाशूल - पश्चिम दिशा में

⛅ व्रत पर्व विवरण - कामदा एकादशी

 💥 विशेष - हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l    राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।

💥 आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l

💥 एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।

💥 एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।

💥 जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।


🌷 कामदा एकादशी 🌷

➡ 22 अप्रैल 2021 गुरुवार को रात्रि 11:36 से 23 अप्रैल, शुक्रवार को रात्रि 09:47 तक एकादशी है ।

💥 विशेष - 23 अप्रैल, शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।

 ‘कामदा एकादशी’ ब्रह्महत्या आदि पापों तथा पिशाचत्व आदि दोषों का नाश करनेवाली है । इसके पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है ।

 

🌷 शनि प्रदोष 🌷

🌹 शनिवार को प्रदोषकाल में त्रयोदशी तिथि हो तो उसे शनिप्रदोष कहा जाता है। 

➡ 24 अप्रैल 2021 को शनि प्रदोष है।

🌹 शनिप्रदोष व्रत की महिमा अपार है | स्कन्दपुराण में ब्राह्मखंड - ब्रह्ममोत्तरखंड में हनुमान जी कहते हैं कि 

🌷 एष गोपसुतो दिष्ट्या प्रदोषे मंदवा सरे । अमंत्रेणापि संपूज्य शिवं शिवमवाप्तवान् ।।

मंदवारे प्रदोषोऽयं दुर्लभः सर्वदेहिनाम् । तत्रापि दुर्लभतरः कृष्णपक्षे समागते ।।

👉🏻 एक गोप बालक ने शनिवार को प्रदोष के दिन बिना मंत्र के भी शिव पूजन कर उन्हें पा लिया। शनिवार को प्रदोष व्रत सभी देहधारियों के लिए दुर्लभ है। कृष्णपक्ष आने पर तो यह और भी दुर्लभ है।

➡ संतान प्राप्ति के लिए शनिप्रदोष व्रत एक अचूक उपाय है।

➡ विभिन्न मतो से शनिप्रदोष को महाप्रदोष तथा दीपप्रदोष भी कहा जाता है। कुछ विद्वान केवल कृष्णपक्ष के शनिप्रदोष को ही महाप्रदोष मानते हैं।

➡ ऐसी मान्यता है की शनिप्रदोष का दिन शिव पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है। अगर कोई व्यक्ति लगातार 4 शनिप्रदोष करता है तो उसके जन्म जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं साथ ही वह पितृऋण से भी मुक्त हो जाता है।

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