श्री शारदा सर्वज्ञ पीठम
🚩जय सत्य सनातन🚩
🌥️ 🚩युगाब्द-५१२२
🌥️ 🚩सप्तर्षि संवत-५०९६⛅🚩विक्रम संवत-२०७७
⛅ 🚩तिथि - चतुर्थी रात्रि 11:28 तक तत्पश्चात पंचमी
⛅ दिनांक 17 मार्च 2021
⛅ दिन - बुधवार
⛅ विक्रम संवत - 2077
⛅ शक संवत - 1942
⛅ अयन - उत्तरायण
⛅ ऋतु - वसंत
⛅ मास - फाल्गुन
⛅ पक्ष - शुक्ल
⛅ नक्षत्र - अश्विनी सुबह 07:31 तक तत्पश्चात भरणी
⛅ योग - इन्द्र सुबह 09:00 तक तत्पश्चात वैधृति
⛅ राहुकाल - दोपहर 12:47 से दोपहर 02:17 तक
⛅ सूर्योदय - 06:46
⛅ सूर्यास्त - 18:47
⛅ दिशाशूल - उत्तर दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी
💥 विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌷 बुढ़ापे में झुर्रियों से बचने हेतु 🌷
👉🏻 बड़ी उम्रवालों को सूखा नारियल चबाके खाना चाहिये तो झुर्रियां नहीं पड़ेगी | नारंगी खाना चाहिये तो झुर्रियां नहीं पड़ेगी |
🌷 मास अनुसार देवपूजन 🌷
➡ माघ मास में सूर्य पूजन का विशेष विधान है | भविष्य पुराण आदि में वर्णन आता है | आरोग्यप्राप्ति हेतु बोले, माघ मास आया तो सूर्य उपासना करों |
➡ फाल्गुन मास आया तो होली का पूजन किया जाता है.. बच्चों की सुरक्षा हेतु |
➡ चैत्र मास आता है चैत्र मास में ब्रम्हा, दिक्पाल आदि का पूजन कियाजाता है ताकि वर्षभर हमारे घर में सुख-शांति रहें |
➡ वैशाख मास भगवान माधव का पूजन किया जाता है ताकि, मरने के बाद वैकुंठलोक की प्राप्ति हो | ॐ नमो भगवते वासुदेवाय... |
➡ जेष्ठ मास में यमराज की पूजा की जाती है जो की वटसावित्री का व्रत सुहागन देवियाँ करती हैं | यमराज की पूजा की जाती है ताकि, सौभाग्य की प्राप्ति हो, दुर्भाग्य दूर हो |
➡ श्रावण मास में दीर्घायु की प्राप्ति हो, श्रावण मास में शिवजी की पूजाकी जाती है | अकाल मृत्यु हरणं सर्व व्याधि विनाशनम् |
➡ भाद्रपद मास में गणपति की पूजा करते है की, निर्विध्नता की प्राप्ति हेतु |
➡ आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में फिर पितृ पूजन करते है की, वंश वृद्धि हेतु | और अश्विन मास के शुक्ल पक्ष में माँ दुर्गा की पूजा होती है की, शत्रुओं पर विजय प्राप्ति हेतु नवरात्रियां |
➡ कार्तिक मास में लक्ष्मी पूजा की जाती है, सम्पति बढ़ाने हेतु |
➡ मार्गशीर्ष मास में विश्वदेवताओं का पूजन किया जाता है कि जो गुजर गये उनकी आत्मा की शांति हेतु ताकि उनको शांति मिले | जीवनकाल में तो बिचारेशांति न लें पाये और चीजों में उनकी शांति दिखती रही पर मिली नहीं | तो मार्गशीर्ष मास में विश्व देवताओं का पूजन करते हैं भटकते जीवों के सद्गति हेतु |
➡ आषाढ़ मास में गुरुदेव का पूजन करते हैं अपने कल्याण हेतु और गुरुदेव का पूजन करते हैं तो फिर बाकी सब देवी-देवताओं की पूजा से जो फल मिलता है वह फल सद्गुरु की पूजा से भी प्राप्त हो सकता है, शिष्य की भावना पक्की हो की – सर्वदेवोमय गुरु | सभी देवों का वास मेरे गुरुदेव में हैं | तोअन्य देवताओं की पूजा से अलग-अलग मास में अलग-अलग देव की पूजा से अलग-अलग फल मिलता है पर उसमें द्वैत बना रहता है और फल जो मिलता है वो छुपने वाला होता है | पर गुरुदेव की पूजा-उपासना से ये फल भी मिल जाते है और धीरे-धीरे द्वैत मिटता जाता है | अद्वैत में स्थिति होती जाती है |
🌷 चंदन तिलक की महिमा 🌷
🚩 चंदनस्य महतपुण्यं पवित्रं पाप नाशनम |
आपदं हरति नित्यं लक्ष्मी तिष्ठति सर्वदा ||
➡ चंदन का तिलक महापुण्यदायी है | आपदा हर देता है |
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