'367 डी' उठाती है कुछ बड़े सवाल!
जोर जबरदस्ती यानी किसी की इच्छा के विरुद्ध उस पर हावी होना उससे शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करना और यह जोर जबरजस्ती स्त्री हो या पुरुष दोनों में से किसी के साथ भी की जाए तो गुनाह है और अपराधी सजा का हकदार है।
367 डी में इसी की स्पष्ट व्याख्या देखकर कुछ सवालों को उठाया गया है। बॉलीवुड की ताजा रिलीज 367 डी एक सामाजिक कलंक में पुरुषों के साथ गैंगरेप के मामले को उठाया गया है। वैसे तो यह एकदम नया विषय है, मगर अटपटा लग सकता है। भला पुरुषों के साथ भी गैंगरेप होता है!
कानून में महिलाओं के साथ गैंग रेप करने वालों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है। भारतीय दंड संहिता की धारा 367 डी के तहत परिस्थितियों के अनुसार 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है, जिसे रेप पीड़िता को दिया जाता है मगर पुरुषों के साथ गैंग रेप करने वालों के लिए किसी सजा का प्रावधान नहीं है। कानून भी शायद ही मानता है कि पुरुषों के साथ रेप या गैंगरेप नहीं हो सकता।
कानून में बदलाव की जरूरत है। हमारे देश में महिलाओं के साथ होने वाली गैंग रेप की घटना आए दिन होती रहती हैं। गैंग रेप करने वालो में इन दिनों उत्तर प्रदेश में इन दिनों अपराधियों की संख्या अधिक है, मगर कभी-कभी हिजड़ों या किशोरों के साथ भी दुष्कर्म के मामले सामने आते हैं। पुरुषों के साथ हुए रेप या गैंगरेप की रिपोर्ट पुलिस दर्ज नहीं करती। कभी-कभी वह व्यक्ति खुद रिपोर्ट न लिखवा कर अंदर ही अंदर घुटता रहता है या सुसाइड कर लेता है। दुनिया वाले उससे घृणा करते हैं और उसका उपहास उड़ाते हैं।
'367 डि' पुरुष गैंगरेप पर बनी फिल्म है। गैंग रेप जैसे जघन्य अपराध के इर्द-गिर्द हाथरस कांड के बाद से लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर था, लेकिन गैंगरेप के मामले यहीं नहीं थमे. बलरामपुर गैंग रेप कांड फिर से हो गया 367 डी में किसी लड़की के साथ गैंगरेप की कहानी नहीं एक लड़के के साथ गैंगरेप की कोशिश की कहानी है, जिस कोर्ट की लड़ाई लड़नी पड़ती है। बॉलीवुड में कोर्ट रूम ड्रामा वाली फिल्में 90 के दशक में खूब बनी 'दामिनी' के बाद 2016 में आई 'पिंक' को खूब पसंद किया गया।
रेप और गैंगरेप में क्या फर्क होता है, जब कोई एक व्यक्ति किसी से जबरन यौन संबंध बनाने की कोशिश करता है तो उसे रेप माना जाता है। जब एक से अधिक व्यक्ति किसी के साथ जबरन यौन संबंध बनाते हैं तो उसे गैंगरेप माना जाता है। यदि तीन या चार आदमी किसी के साथ जबरदस्ती करते हैं और एक आदमी रेप नहीं भी करता मगर वह उनके साथ इस कृत्य में शामिल है तो यह धारा उस पर भी लागू होती है जैसा कि इस फिल्म में दिखाया गया है चार आरोपी दो युवकों को युवती समझकर जबरन अपनी गाड़ी के अंदर खींच लेते हैं और उनसे गैंगरेप करने का प्रयास करते हैं मगर इस कृत्य में कार का ड्राइवर शामिल नहीं होता फिर भी उस पर गैंगरेप की धारा लागू हो जाती है। यानी कि वह भी बराबर का दोषी माना जाएगा दूसरे इसको भी क्लियर किया गया है कि पुरुषों के साथ भी गैंगरेप की कोशिश हो सकती है।
अपराधियों के इरादे क्या हैं उनके उद्द्देश्य क्या है इसे देखा जाता है भले ही अपराधियों ने युवती होने के मुगालते में दो युवकों के साथ गैंगरेप की कोशिश की लेकिन उनका मकसद साफ-साफ इस फिल्म में जब अपराधी युवकों के साथ रेप करने में सफल नहीं हो पाते तो उन्हें चलती गाड़ी से फेंक कर भाग जाते हैं। पीड़ित दोनों युवकों के हाथ पर रसिया बांधे जाने के निशान मौजूद रहते हैं अब सवाल उठता है कि क्या पुरुषों के साथ भी गैंगरेप हो सकता है महिलाओं के साथ तो अक्सर होते ही रहता है जी हां जबरदस्ती किसी के साथ हो पुरुष के साथ या महिला के साथ गैंगरेप की कोशिश मानी जाती है भले ही हमारे कानून में पुरुषों के साथ होने वाली जोर जबरदस्ती या गैंगरेप पर कोई स्पष्ट कानून न हो मगर धारा 367 डी के तहत उनके साथ जोर जबरदस्ती करने वालों के खिलाफ भी वहीं सजा का प्रावधान है जो महिलाओं के साथ गैंगरेप करने पर होती है इस फिल्म में केस का फैसला सुनाते वक्त जज द्वारा एक उदाहरण यह देखकर इस बात को समझाया गया और धारा 367 डी की व्याख्या की गई है।
टिप्पणियाँ