शिकारी और सियार





एक शिकारी ने हाथी का शिकार किया और उसके दांत निकाल लिए। इतने में एक सर्प निकला, उसने शिकारी को काट खाया, वह गिर पड़ा। हाथी के मरने से एक खरगोश का कचूमर पहले ही निकल चुका था। एक सियार उधर से निकला तो इतने शिकार एक साथ पड़े देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। महीनों के लिए भोजन मिल गया। उसने शिकारी का धनुष पड़ा देखा उसमें तांत की प्रत्यंचा लग रही थी। पहले इस छोटी खुराक को खत्म कर ले तब बड़ों पर हाथ डालेंगे, यह सोचकर उसने तांत को जैसे ही चबाया, वैसे ही वह टूटी और धनुष का सिरा उसके मुंह में जोर से लग गया और वह वहीं ढेर हो गया। वास्तव में लालची और अदूरदर्शी-इसी प्रकार शहद के लोभ में जान गवा बैठने वाली मक्खी की तरह जोखिम उठाते हैं। 

 

 



 



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