कुछ सज्जनों का हृदय देश , स्वजनों और मानवता के लिए सदैव ही धड़कता रहता है। उनका जीवन और प्रत्येक सांस मानवता के लिए पूरी तरह समर्पित हैं। पूर्वी लंदन में यूनाइटेड किंगडम की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा( NHS, UK) में एक पेशेवर की तरह कार्य करने वाली डॉक्टर रिमोना सेनगुप्ता एक ऐसा ही व्यक्तित्व हैं | इनका जन्म UK व् पालन-पोषण भारत में हुआ और इनका वर्तमान में भी मित्रों व् परिवार के माध्यम से भारत से सम्बन्ध, “एक बड़ वृक्ष की जड़ों के सामान” अभी भी गहराई से जुड़ा हुआ है | इनकी वर्तमान नौकरी की भूमिका के कारण इन्हें अस्पताल में भर्ती होने से बचने के लिए घरेलू उपचार दलों के साथ रोगी के स्वास्थ्य देखभाल करने की एक उत्तम अंतर्दृष्टि हैं | हम सभी भारत में कोविड के कारण उत्पन्न हुई भयवाह स्थिति से पूर्णतः अवगत हैं तथा इस दूसरी लहर में विगत कुछ सप्ताह में ऑक्सीजन की कमी , अस्पताल में शैय्या(बेड) की कमी या दवाईओं की कमी से अवगत हैं और इनसे बढ़ते संकट की रिपोर्टें विभिन्न संचार माध्यमों से सुनी , देखी एवं पढ़ी हैं | ऐसी ही परिस्थियों में डॉ रिमोना जैसे व्यक्तित्व आगे आते हैं जो भारत में...
नोएडा। गौतम बुध नगर में दबंग आईपीएस अधिकारी वैभव कृष्ण के 5 आईपीएस अधिकारियों द्वारा ट्रांसफर पोस्टिंग में पैसे लेने के खुलासे के ठीक बाद आनन-फानन में प्रदेश सरकार ने कानून व्यवस्था को चुस्त बनाने के लिए प्रदेश में दो मुख्य शहर लखनऊ व गौतम बुध नगर में कमिश्नरी प्रणाली लागू कर दी व एडीजी रैंक के अफसर को बताए बतौर पुलिस कमिश्नर बनाकर तैनात कर दिया। लेकिन अपराधों में कमी नहीं आयी। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक तरुण भारद्वाज ने प्रदेश भर में बढ़ते अपराधों के बारे में कहा कि मुख्यमंत्री की अपराधों को रोकने के लिए कमिश्नरी सिस्टम को लागू करने की सोच अच्छी है, लेकिन इसके बावजूद अपराधों में काफी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अपराधों के ग्राफ में काफी कमी दर्ज होगी, लेकिन हो इसका उल्टा रहा है। अपराध पहले की अपेक्षा बढ़ गए हैं, आए दिन लूट, डकैती, चुनौती, फिरौती की घटनाएं बढ़ रही है और पुलिस इन्हें रोक पाने में सक्षम से हो रही है। तरुण भारद्वाज ने कहा कि नोएडा पूरे प्रदेश का 'शो विंडो' है, ऐसे में इस बात की अहमियत बढ़ जाती है कि अपराधो...
बुजुर्गों का सम्मान हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है, लेकिन बदलते समय के साथ इसमें गिरावट आ चली है। विश्व स्तर पर वृद्धों की स्थिति का आकलन करने वाले आंकड़ों के आधार पर भारत में वृद्धों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। परिवार एवं समाज में उनकी अपेक्षा एवं तिरस्कार की घटनाएं बढ़ती जा रही है। बढ़ते वृद्धाश्रम की संख्या इस कटु सत्य की ओर संकेत करती है। इसमें सुधार की अत्यंत आवश्यकता है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि बुजुर्ग अनुभव से पक्की श्रद्धा सम्मान के पात्र परिवार के बहुमूल्य सदस्य एवं किसी भी समाज के लिए अमूल्य होते हैं। इनकी देखरेख हमारा पावन कर्तव्य है और संयुक्त परिवार विखंडित हो रहे हैं। परिवार का ताना-बाना भी बिखर रहा है। एकल परिवारों का चलन जोरों पर है। बच्चों का विकास अवरुद्ध सा दिखता है। ऐसे में परिवार में बुजुर्गों के महत्व को समझने की जरूरत है। बुढ़ापे में इंद्रियां शिथिल हो जाती हैं शरीर पूरी क्षमता के साथ काम करने में सक्षम नहीं होता है। यह हर इंसान के लिए सत्य है कि सबको एक दिन बुढ़ापे की इस अवस्था से गुजर ना ही होता है। अतः हमारा कर्तव्य बनता है कि अवश्य प्रक्रिया का सम्...
अप्रैल माह का वेतन देने के लिए बाधित न किया जाये, उद्यमिओ से अप्रैल महीने के फिक्स्ड व मिनिमम चार्ज से छूट देने की मांग नोएडा। कोविड-19 कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी गौतम बुध नगर सुहास एल.वाई. ने कैंप ऑफिस नोएडा के सभागार में उद्योग बंधु के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए कहा कि जनपद गौतम बुध नगर में स्थापित औद्योगिक इकाइयों को देश की कैपिटल के रूप में देखा जाता है और कोविड-19 कोरोना वायरस जैसी महामारी से लड़ने में जनपद गौतम बुद्ध नगर के उद्योग बंधुओं की अहम भूमिका है। अतः जनपद के समस्त बंधुओं के द्वारा अपने अपने कर्मचारियों एवं मजदूरों के हितों का ध्यान रखते हुए मार्च 2020 का वेतन सभी को समय से उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए, ताकि आपातकाल की स्थिति में कर्मचारियों एवं मजदूरों को अपना जीवन यापन करने में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। डीएम ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार की मंशा के अनुरूप किसी भी औद्योगिक इकाई के द्वारा मार्च माह का वेतन अपने मजदूरों एवं श्रमिकों को देना संज्ञान में नहीं आएगा तो ऐसे ...
एक तिहाही कामगारों से कितना उत्पादन हो सकेगा, ज्यादातर लेबर घरो को लोट चुकी है रॉ मटेरियल अन्य राज्यों से लाना पड़ता है, लॉक डाउन के कारण मार्किट बंद नोएडा । उत्तर प्रदेश प्रशासन और जिला प्रशासन ने काफी समय से बंद कारोबार को दोबारा शुरू करने के लिए कुछ औद्योगिक गतिविधियों के संचालन का निर्णय लिया है,तथा सुबकते ऑनलाइन पोर्टल जारी कर औद्योगिक गतिविधियों के संचालन का निर्णय लिया व कुछ (pick & Choose) औद्योगिक गतिविधियों व संचालको को अनुमति प्रदान कर दी है। जबकि हज़ारो अनुमति अभी भी पेंडिंग है। अपनी मनमर्जी के लिए प्रसिद्ध नोएडा व जिला प्रशासन की अधिकारिओ ने इसमें भी खूब गड़बड़िया की है जिससे नोएडा ग्रेटर नोएडा में मौजूद तमाम औद्योगिक इकाइयां खासी नाराज़ है। फेडरेशन ऑफ़ नोएडा इंडस्टीज के महासचिव तरुण अनेजा ने बताया कि नोएडा के कुछ औद्योगिक सेक्टरों में अनुमति कन्टेनमेंट जोन में होने के कारण नहीं मिल रही और जो औद्योगिक सेक्टर कन्टेनमेंट जोन से बाहर है उन्हें प्राधिकरण की मनमानी के चलते अनुमति पेंडिंग है, तो कही बॉर्डर सील होने की वजह से इकाइयों तक आने में असमर्थ हैं। इसके अला...
Oil & Gas Best Sellers! During the course of last Budget presentation there was much brouhaha on Capital Investment Outlay. It was pegged at Rs 10 Lakh Crore, a whopping increase of 33%, being 3.3% of GDP. This allocation was to galvanize economic growth and create employment opportunities. The final acts of Annual Budget ritual, for 2024-25, are on. Halwa has already been partaken(sic). As expected, a number of analysis, projections and expectations are doing the rounds. Although, the road shows of publicly ruminating before the Finance Minister, on Live Television, seem to be absent, this time round. For those, who are somewhat parochially involved in a particular sector, a few quick insights, are simply unmissable. As per information available in public domain, for 23-24, GDP at current rates is expected to be Rs 296.58 Lakhs, indicating a growth rate of 8.9%. This is substantially lower than 16.1% growth in the previous year. While employment generated data for 23-24 is no...
भारतीय पिता पुत्र की जोड़ी भी बड़ी कमाल की जोड़ी होती है । दुनिया के किसी भी सम्बन्ध में, अगर सबसे कम बोल-चाल है, तो वो है पिता-पुत्र की जोड़ी में । एक समय तक दोनों अंजान होते हैं, एक दूसरे के बढ़ते शरीरों की उम्र से, फिर धीरे से अहसास होता है, हमेशा के लिए बिछड़ने का । जब लड़का, अपनी जवानी पार कर, अगले पड़ाव पर चढ़ता है, तो यहाँ, इशारों से बाते होने लगती हैं, या फिर, इनके बीच मध्यस्थ का दायित्व निभाती है माँ । पिता अक्सर पुत्र की माँ से कहता है, जा, "उससे कह देना" और, पुत्र अक्सर अपनी माँ से कहता है, "पापा से पूछ लो ना" इन्हीं दोनों धुरियों के बीच, घूमती रहती है माँ । जब एक, कहीं होता है, तो दूसरा, वहां नहीं होने की, कोशिश करता है, शायद, पिता-पुत्र नज़दीकी से डरते हैं । जबकि, वो डर नज़दीकी का नहीं है, डर है, उसके बाद बिछड़ने का । भारतीय पिता ने शायद ही किसी बेटे को, कभी कहा हो, कि बेटा, मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ । पिता के अनंत रौद्र का उ...
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