उल्टी-सीधी नोटिंग कर अधिकारियों को गुमराह करते कर्मचारी
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारियों का खेल निराला है, कर्मचारी जानते हैं अधिकारी (आईएएस/ पीसीएस) कुछ समय के लिए प्राधिकरण में आते हैं और उन्हें नियम और नीतियों का ज्ञान नहीं होता है, इसलिए कर्मचारी अपनी मनमर्जी की फाइल बनाते हैं और अधिकारियों को गुमराह कर हस्ताक्षर भी करवा लेते हैं।
ऐसा ही कुछ आवासीय विभाग में भी होता है। प्राधिकरण तथा कोर्ट के आदेश से प्राधिकरण की नीति के अनुसार जब तक किसी सेक्टर में बिजली /पानी/ सीवर/ सड़कों की सुविधा नहीं होती तब तक आवंटी को भवन निर्माण के लिए समयअवधि नि:शुल्क दी जाती है, ऐसा नियम भी है। लेकिन कार्यालय के बाबू पैसे खाने के चक्कर में नियमों को ना मानकर भवन निर्माण के लिए सा शुल्क की फाइल चला देते हैं और उच्च अधिकारियों को गुमराह कर उनके गलत नोटिंग पर हस्ताक्षर ले लेते हैं। एक बार हस्ताक्षर के बाद दोबारा फाइल खोलने की परंपरा नहीं है और फाइल खुलेगी भी तो मुख्य कार्यपालक अधिकारियों के आदेश के बाद।
अनपढ़ अधिकारी क्योंकि इनपर निर्भर होते हैं और पैसे का लेनदेन इन्हीं के मार्फत होता है तो बिना नियमों की जानकारी लिए फाइल कर बंद कर देते हैं। ऐसे कई केस हैं जिनपर पूर्व ओएस (आवासीय) ने गलत नोटिंग कर फाइल खराब कर दी। अब अन्य अधिकारी भी ऐसी फाइलों को छेड़ने से घबराते हैं। वैसे भी रिटायर होने के बाद भी ये साहब कई महीनों तक प्राधिकरण के कार्यालय में चक्कर लगाए पाए जाते हैं जैसे उनके बिना प्राधिकरण का काम अधूरा रह जाएगा या बंद हो जाएगा। अन्य कर्मचारियों का भी कहना था कि इन की आत्मा अभी भी प्राधिकरण में ही भटकती मिल जाएगी मिल जाएगी।
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