बुद्धिमत्ता

एक बार की बात है, सम्राट अकबर ने अपने दरबारियों की बुद्धि परखने के लिए एक चादर मंगवाई, जो उनकी लंबाई से छोटी थी। सभी से ऐसा प्रश्न पूछा जा रहा था कि बिना चादर को घटाएं बढ़ाएं, उनका शरीर कैसे ढक जाए, दरबारियों में से किसी से भी उतर न बन पड़ा।  तो बीरबल ने जवाब दिया हजूर अपने पैर मोड़े, तो मजे से उसी चादर में तन ढक कर सोए। यह बुद्धिमानी की बात सुनकर सम्राट सहित सभी दरबारी गणों ने उनकी बुद्धिमत्ता को खूब  सराहा। वास्तव में साधनों को बढ़ाएं बिना भी आवश्यकताएं कम करके गुजर हो सकती है। 


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