भ्रष्टाचार में लिप्त पांचो आईपीएस अधिकारियों की जांच सार्वजनिक की जाए
नोएडा साल 2020 की शुरुआत काफी धमाकेदार रही थी। गौतम बुध नगर जिले में तैनात रहे दबंग आईपीएस अधिकारी ने ट्रांसफर पोस्टिंग भ्रष्टाचार में लिप्त 5 आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर आईपीएस अधिकारियों द्वारा व्हाट्सएप चैट सार्वजनिक भी कर दिया था।
उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की रिकॉर्डिंग, जिसमें वे ट्रांसफर पोस्टिंग के नाम पर पैसों का लेन-देन की बात कर रहे थे और 1 जिले के कप्तान ओवरलोड गाड़ियों को पास करवाने का सौदा कर रहे थे। इस संबंध में एसएसपी वैभव कृष्ण ने जांच रिपोर्ट मामला सार्वजनिक होने से पहले ही गृह मंत्रालय को भेज दी थी, लेकिन काफी समय बाद भी जब कोई कार्रवाई इस संबंध में नहीं हुई तो उन्होंने मामला सार्वजनिक किया था।
तमाम प्रकरण में गौरतलब रहा कि डीजीपी और गृह मंत्रालय को इन अधिकारियों के 'कुकृत्य' की रिपोर्ट मिलने के बाद भी इन पर क्यों कोई कार्यवाही नहीं की गई? कार्रवाई ना होना यह दर्शाता है कि ट्रांसफर पोस्टिंग व अन्य आपराधिक मामलों में पुलिस विभाग व गृह मंत्रालय की भी सांठगांठ रही होगी।
आज इस मामले को बीते 8 माह हो चुके हैं लेकिन ना तो प्रदेश सरकार और ना ही गृह मंत्रालय ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की है, और ना ही किसी भी चर्चित अधिकारी पर कोई कार्रवाई।
'नोएडा दर्पण' को इस संबंध में मालूम चला है कि भ्रष्टाचार में ना में पांचो आईपीएस अधिकारियों को विभिन्न महकमों जैसे पीएसी, ट्रेंनिंग इंस्टीट्यूट आदि में पोस्टिंग दे दी गई है जबकि इस पूरे मामले को खोलने वाले आईपीएस अधिकारी वैभव कृष्ण को सस्पेंड किया हुआ है। वही प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा आरोपी पुलिस अधिकारियों पर कोई कार्यवाही नहीं करना प्रदेश सरकार को भी कटघरे में खड़ा करता है? इसके अलावा आज घटना को सामने आए 8 महीने बीतने पर भी जांच पूरी ना हो ना वह जांच को सार्वजनिक ना करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है? प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने तेजतर्रार व कठोर रवैया के कारण जाने जाते हैं लेकिन इस विषय पर मौन हैं?
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