क्या है एनकाउंटर हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट की 16-सूत्री गाइडलाइन?

सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में एनकाउंटर हत्याओं के संबंध में कहा था कि सरकार किसी भी व्यक्ति को संविधान के तहत मिले जीने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकती। इसके बाद उसने 16-सूत्री गाइडलाइन भी जारी की थी।
1. आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी मुखबिरी का रिकॉर्ड लिखित या इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में रखा जाएं।
2. यदि किसी टिप-ऑफ पर पुलिस हथियारों का इस्तेमाल करती है और किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उचित आपराधिक जांच को शुरू करती हुई एफआईआर दर्ज की जाएं।
3. इस तरह की मौत के मामले की जांच स्वतंत्र सीआईडी टीम करेगी, जिसने कम से कम आठ जांच इससे पहले की हो।
4. एनकाउंटर हत्याओं में मजिस्ट्रियल जांच अनिवार्य तौर पर की जाए।
5. एनएचआरसी या राज्य के मानव अधिकार आयोग को एनकाउंटर में हुई मौत की जानकारी तत्काल दी जाए।
6. घायल पीड़ित/अपराधी को तत्काल चिकित्सकीय मदद दी जाए और मजिस्ट्रेट उसका बयान दर्ज करें।
7. बिना किसी देरी के एफआईआर और पुलिस डायरी को कोर्ट भेजना सुनिश्चित करें।
8. तत्काल ट्रायल शुरू करें और उचित प्रक्रिया का पालन करें।
9. कथित अपराधी के निकट रिश्तेदार को मौत की सूचना दें।
10. सभी एनकाउंटर मौतों का ब्योरा दो साल में एनएचआरसी और राज्य आयोगों को निर्धारित फॉर्मेट में सौंपा जाए।
11. यदि कोई एनकाउंटर गलत तरीके से किया जाता है तो दोषी पुलिस अधिकारी को निलंबित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
12. सीआरपीसी के तहत मृतक के रिश्तेदार को मुआवजा दिया जाए।
13. पुलिस अधिकारियों को संविधान के आर्टिकल 20 के तहत मिले अधिकारों के संबंध में जांच के लिए अपने हथियार तत्काल सरेंडर करने होंगे।
14. आरोपी पुलिस अधिकारी के परिवार को तत्काल सूचना दी जाएं और उन्हें वकील/सलाहकार की सेवाएं दी जाए।
15. एनकाउंटर हत्या में शामिल अधिकारियों को कोई आउट ऑफ टर्न पुरस्कार या प्रमोशन नहीं दिया जाए।
16. पीड़ित के परिवार को यदि लगता है कि गाइडलाइंस को फॉलो नहीं किया गया है तो वह सेशंस जज को शिकायत कर सकता है। जज संज्ञान लेंगे।


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