देश की करीब 20% आबादी मानसिक रूप से बीमार
खबर आती है कि एक्टर सुशांत सिंह राजपूत ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। जिसने भी सुना, हर कोई दंग रह गया। हर किसी के जेहन में बरबस कुछ सवाल आए? आखिर हुआ क्या? कामयाब सुशांत ने ऐसा किया क्यों? फिर पता चलता है कि सुशांत डिप्रेशन का शिकार थे।
खैर, यह पहला वाकया नहीं है, जब किसी सेलिब्रिटी ने डिप्रेस्ड होकर अपनी जान दी हो। इस फेहरिस्त में कई और नाम भी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि दुनियाभर में 26.4 करोड़ से ज्यादा लोग डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 7.5% भारतीयों को किसी न किसी तरह का मानसिक रोग है, इनमें से 70% को ही इलाज मिल पाता है। 2020 में भारत की करीब 20 फीसदी आबादी मानसिक रूप से बीमार या डिप्रेशन का शिकार हो सकती है। पुरुषों से ज्यादा महिलाएं डिप्रेशन से पीड़ित हैं।
हर सात में एक भारतीय मेंटल डिसऑर्डर का शिकार
- द लैंसेट की एक स्टडी बताती है कि 2017 में 19.73 करोड़ भारतीय मेंटल डिसऑर्डर से जूझ रहे थे। इनमें से 4.57 करोड़ डिप्रेसिव डिसॉर्डर और 4.49 करोड़ लोग घबराहट का शिकार थे। स्टडी के अनुसार, 2017 में हर सात में से एक भारतीय मेंटल डिसऑर्डर से ग्रस्त था। 1990 के बाद से भारत के कुल रोग भार में मेंटल डिसऑर्डर का अनुपात योगदान लगभग दोगुना हो गया है।
डिप्रेशन का अंत सुसाइड है
- अहमदाबाद की साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर दीप्ति जोशी बताती हैं कि डिप्रेशन का अंत सुसाइड ही है। डब्ल्यूएचओ भी इस बात को मानता है। डॉक्टर दीप्ति के मुताबिक, डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति में इंटेलिजेंस उपयोग करने की क्षमता खत्म हो जाती है।
- अब सवाल उठता है कि भारतीय समाज में डिप्रेशन जैसी चीज इतनी तेजी से कैसे फैल रही है। राजस्थान के उदयपुर स्थित गीतांजलि हॉस्पिटल में असिस्टेंट प्रोफेसर और साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर शिखा शर्मा इसका जिम्मेदार समाज को मानती हैं। वह कहती हैं कि हमारी सोसाइटी में अवेयरनेस नहीं है और एक्सेप्टेंस भी नहीं है। इसी वजह से लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
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