दैनिक भास्कर का सुझाव: ट्रेन के डिब्बों को ही क्यों न अस्पताल बना दीजिए?
देश में बढ़ते कोरोना के मरीजों की संख्या देखते हुए दैनिक भास्कर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से अपील की है कि कोरोना से लड़ने के लिए क्यों न हम यार्ड में बेबस खड़ी कुछ विशेष ट्रेनों को ही अस्थायी अस्पताल में तब्दील कर दें। क्योंकि यहां बेड हैं, टॉयलेट हैं और इन्हें कहीं लाना-ले जाना भी बेहद आसान है। साथ ही अन्य सुविधाएं भी मौजूद हैं। ट्रेनों में फर्स्ट एसी और सेकेंड एसी के डिब्बे इसके लिए सबसे उपयुक्त हो सकते हैं।
यही नहीं, इन डिब्बों का इस्तेमाल आइसोलेशन वार्ड के रूप में भी किया जा सकता है। चूंकि, देशभर में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन घोषित हो चुका है। ऐसे में ये खाली ट्रेनें महामारी से लड़ने में बड़ा हथियार साबित हो सकती हैं। वैसे भी अगर देश में कोई बड़ी आपदा आती है तो घायलों को लाने, ले जाने और प्राथमिक उपचार देने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ऐसे में कोरोना रिलीफ ट्रेनें क्यों नहीं तैयार की जा सकतीं। वही कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रिय संयोजक - विचार विभाग तरुण भारद्वाज ने भी देश के प्रधान मंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि कर्फू के दौरान सैन्य बलों को उपकरण दिए जाये ताकि वे सडको पर आने वालो को चेक क्र सके और जरुरत हो तो वही से अस्पतालों के qurantine सेंटर भेज सके, और सेना को और ख़राब स्थिति होने से पहले तैनात किया जाये।
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