आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए चाइना के खिलाफ आईसीजे में याचिका दायर करें
देश में चल रहे कोरोना वायरस के संकट के कारण देशभर के सभी वर्गों को विभिन्न प्रकार के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। जनसाधारण की तरफ से इकनॉमिक रिलीफ मेजर्स की मांग करते हुए एडवोकेट पंकज चांदगोठिया ने जनहित में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक लीगल डिमांड नोटिस भेजा है। इसमें उन्होंने मांग की है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की मियाद 31 मार्च 2020 से 31 जून 2020 तक कर दी जाए। इसके अलावा बैंकों की किश्त, ईसीएस और चेक आदि बैंक द्वारा कम से कम अगले 60 दिन तक होल्ड पर रखे जाएं। इसके अलावा प्राईवेट इंप्लाॅइज की सैलरी जो बिना काम के संस्थानों ने देनी है। उस खर्च को उनकी टैक्सेबल इनकम से सीधे तौर पर डिडक्ट करने का प्रावधान किया जाए। इसके अलावा सभी तरह के टैक्स, जीएसटी, इनकम टैक्स, टोल टैक्स आदि में तीन महीने की टैक्स हॉलीडे दी जाए। इसके अलावा दिहाड़ीदार मजदूरों और बीपीएल परिवारों को देशभर में 6 हजार रुपए की रकम उनके बैंक खातों में डाल दी जाए। पीएम को भेजे मांग पत्रों में कहा है कि इन सभी कार्रवाइयों से देश को भारी नुकसान होना लाजिमी है। इसकी भरपाई करने के लिए भारत को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में चाइना के खिलाफ याचिका डाल के कम से कम 13 लाख मिलियन डॉलर की डेमेजेज के तौर पर मांगी रखी जानी चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में यह प्रावधान है कि कोई भी देश अपने किसी भी सिटीजन द्वारा उठाए गए मुद्दे को राष्ट्र की तरफ से किसी दूसरे राष्ट्र के खिलाफ केंटेंशियस केस डालकर इस पर कार्रवाई की मांग कर सकता है। चांदगोठिया ने कहा कि यह जगजाहिर है कि मौजूदा विपत्ति केवल चाइना की वजह से पूरी दुनिया में फैली है। इस वायरस की शुरुआत चाइना की वुहान शहर से हुआ है कि और यह पूरी तरह से सिद्ध हो चुका है। चाइना इंटरनेशनल ट्रीटी का हिस्सा है।
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