मंत्र साधना इष्ट से संपर्क का माध्यम
मन्त्र साधक और इष्ट में संपर्क का माध्यम है। मानव ने अपने कल्याण के साथ्ज्ञ.साथ दैविक जीवन की सम्पूर्ण समस्याओं के समाधान हेतु यथा समय मंत्रों का प्रयोग किया है। विविध प्रयोजन के लिए मंत्रों का उपयोग और परिणाम कहनें सुननें से ज्यादा अनुभव का विषय है। मंत्र चिकित्सा के द्वारा व्यक्ति रोग निवारण के मंत्रों रूपी रामबाण औषधी का प्रयोग कर सकता है। जीवन में उत्रति पाने के लिए मंत्र एक समर्थ उपाय है। मंत्रों में प्रयुक्त स्वरए व्यंजनए नाद व बिंदू देवताओं या षक्ति के विभित्र रूप एवं गुणों को प्रदर्शित करते है। मन्त्राक्षरों वाद एवं बिन्दूओं में दैवी शक्ति छिपी रहती है। मंत्र उच्चारण से ध्वनि उत्पत्र होती है। उत्पत्र ध्वनि का मंत्र के साथ विशेष प्रभाव होता है। इसके प्रयोग से बड़े से बड़े दूर्लभ कार्यों को किया जा सकता है। लिंगानुसार मंत्रों के तीन भेद तीन प्रकार है1. जिन मंत्रों के अंत में है या फ्टट् लगा होता है। ऐसे मंत्र, शांति कर्म या वशीकरण में सिद्ध किये जाते है।
2. स्त्री मंत्र . जिन मंत्र के अंत में स्वाहा का प्रयोग होता है। ऐसे मंत्रों का उपयोग षुद्ध क्रियाओं के लिए किया जाता है।
3. नपुंसक लिंग . मंत्रों के अंत में नमः प्रस्तुत होता है, इसका उपयोग समयानुसार किया जाता है।
मंत्र साधना एवं कार्य सफलता हेतु मंत्र जाप के लिए उत्तम त्रतुए तिथिए दिन व समय का चयन करना बहुत आवश्यक है। मंत्र साधक को सर्वप्रामि योग्य गुरू मंत्र दीक्षा लेनी चाहिए। इसके मंत्रजाप के समय मंत्र का स्वर आसन पर योग्य दिशा में बैठना आदि अनेक नियमों का परिपालन करना आवश्यक होता है। मंत्र का प्रभाव आलौकिक होता है किंतु जब तक अनुभव या श्रद्धा न हो जाए तब तक साधना की इच्छा जागृत नहीं हो सकती। मंत्रो द्वारा रोग चिकित्सा का हमारे वेदों पुराणों व मंत्र शास्त्रों में शास्त्रों में बखूब वर्णन मिलता है। एक ध्वनियों के समूह से बनी एक आलौकिक उर्जा का स्त्रोत होता है। ध्वनि विज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा शरीर पर उसकी अचुक प्रतिक्रिया होती है। मंत्रों पर ध्वनि का सटीक व निच्क्ष्ति कम होता है। जिससे हमारे सूक्ष्म शरीर में एक कपन उत्पत्र होकर हमारे सिूल शरीर और उसके चारों ओर के वातावरण को आवेशित कर देता है। मंत्रों की सार्थकता के बारे में कहा गया है दैवाधीन जगत्सर्व मंत्राधीनश्र देवता। अर्थात देवताओं के अधीन संपूर्ण संसार है और यह देवता मंत्रों के देवता मंत्रों के अधीन हैं कि विधि और श्रद्धा से अनुष्ठान किया जाए तो उस मंत्र से संबंधित शक्ति साधक के भीतर जागृत होती है। कि दस छात्र गहीर नींद में सो रहे हों तो राम लाल का नाम पुकारने पर उसी की नींद टुटती है।। उसी तरह जिस देवशक्ति को पुकारा जाता है, वही शक्ति जागृत होती है। कई बार आत्म शक्ति के बल पर नए मंत्र भी प्रकट हो जाते है।
टिप्पणियाँ