केंद्रीय कर्मचारी जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में बट जायेंगे
जम्मू और कश्मीर राज्य गुरुवार से औपचारिक रूप से दो केंद्र शासित प्रदेशो (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बट जायेंगे। इसी के साथ जम्मू और कश्मीर कैडर के आईएएस, आईपीएस और अन्य केंद्रीय सेवाओं के अफसर अपनी सेवाएं इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशो में यथावत जारी रखेंगे। लेकिन इन सेवाओं में जो नई भर्तियां होंगी, वह 'एजीएमयुटी' कैडर के तहत होंगी।
जम्मू और कश्मीर के पुर्नगठन अधिनियम, 2019 के अनुसार प्रांतीय सेवाओं में कार्यरत अधिकारी अपनी सेवाएं मोजूदा तरीके से तब तक जारी रखेंगे, जब तक कि दो नए शासित प्रदेशो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उप राज्यपाल नए आदेश जारी नहीं कर देते हैं। अगस्त में संसद के दोनों सदनों में पारित नए अधिनियम के अनुसार भविष्य में जिन केंद्रीय अफसरों को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशो में नियुक्त किया जायेगा, उन्हें केंद्र सरकार जरुरत के हिसाब से एजीएमयुटी कैडर के लिए भी कर सकती हैं। इसके तहत इन दोनों नए केंद्र शासित प्रदेशो के अलावा हिमाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, यूनियन टेरेटरीज भी आती हैं। इसी 31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख औपचारिक रूप से दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशो में तब्दील हो जायेंगे। नए कानून के तहत जम्मू और कश्मीर में विधानसभा भी होगी जैसे पुडुचेरी में है। लद्दाख बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश होगा। जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लिए क्रमश: गिरीश चंद्र मुर्मू और पूर्व रक्षा सचिव राधा कृष्ण माथुर को नया उप राज्यपाल नियुक्त किया गया हैं। नए अधिनियम के अनुसार आईएएस, आईपीएस व भारतीय वन सेवा के कैडर के लिए जम्मू और कश्मीर कैडर बहाल रहेगा। अधिनियम के अनुसार दोनों नए केंद्र शासित प्रदेशो के उप राज्यपाल प्रवैधानिक शक्ति और अधिकारियो की तैनाती पर फैसले लेंगे।
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