गुणों से भरपूर-काली मिर्च
काली मिर्च को प्राचीन काल से ही घरेलू मसालों का राजा माना जाता है। काली मिर्च बहुत उपयोगी मानी जाती है, क्योंकि शरीर की हर व्याधि का इसमें समाधान छिपा है। यदि भूख कम लगती है या ज्यादा। दोनों रोगों को काली मिर्च ठीक करती है। यदि भूख कम लगती है या ज्यादा। दोनों रोगों को काली मिर्च ठीक करती है। भोजन के स्वाद में वृद्धि होती है। शहद के साथ काली मिर्च खाने से - गले की खराश, दर्द, कफ ठीक हो जाता है। आचार चटनी में काली मिर्च डालने से वे स्वादिष्ट हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मत है कि काली मिर्च पाउडर का सेवन करने से बवासीर में आराम पहुंचता है। पापड़, बड़ी और मठरी बनाते समय उसमें कालीमिर्च का प्रयोग करते हैं। इससे मठरी कड़क एवं स्वादिष्ट बनती है। शिकंजी, लैमन वाॅटर एवं शर्बत में काली मिर्च डालकर पिएं तो चिŸा शांत एवं प्रसन्न हो उठता है। महंगी होने के कारण इसमें पपीते के बीजों का मिश्रण किया जाता है, क्योंकि आकृति और आकार में पपीते के बीज कालीमिर्च जैसे ही नजर आते हैं।
इसको अंग्रेजी में 'ब्लैक पीपर' कहते है। वनस्पति विज्ञान में इसका वैज्ञानिक नाम 'पाईपर नाईग्रम' है। यह पाईपरेसी जाति का पौधा होता है। यह पाचन क्रिया को तेज करती है। रक्त शोधक होती है ंतथा मरोड़ और पेचिश ठीक करने में सहायक होती है। यह सुगंधित मसाला माना जाता है। यदि काली मिर्च का चूर्ण लगातार भोजन से पहले फांका जाए तो यह संजीवनी की भांति कार्य करता है और शरीर का काया कल्प करता है।
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